इतिहासकार अशोक पाण्डेय की पुस्तक ‘हिंसा-अहिंसा और भगत सिंह’ का विमोचन, गांधी और भगत सिंह की विरासत पर हुई सार्थक चर्चा

बीकानेर। जिला उद्योग संघ सभागार में मंगलवार को पी वोहरा फाउंडेशन द्वारा आयोजित ‘लेखक से मिलिए’ कार्यक्रम में इतिहासकार अशोक कुमार पाण्डेय की नवीन पुस्तक ‘हिंसा-अहिंसा और भगत सिंह’ का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में अशोक पाण्डेय ने ‘इतिहास का सच, राजनीति की स्मृति और समाज का विवेक – गांधी और भगत सिंह की वैचारिक विरासत के संदर्भ में’ विषय पर विचार भी व्यक्त किए।

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लेखक एवं वरिष्ठ पत्रकार हरीश बी शर्मा ने पुस्तक पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि इतिहासकार अशोक कुमार पाण्डेय की पुस्तक ‘हिंसा-अहिंसा और भगत सिंह’ में शहीद भगत सिंह के जीवन, उनके विचारों और भारतीय स्वाधीनता संग्राम के विभिन्न पहलुओं की नई नजर से पड़ताल करती नजऱ आती है।

पुस्तक में परंपरागत जीवनी से अलग : यह पुस्तक भगत सिंह की कोई सामान्य या श्रद्धाभाव में लिखी गई पारंपरिक जीवनी नहीं है, बल्कि उनके इर्द-गिर्द बनी कहानियों, समाचारों और ऐतिहासिक छवियों का नए सिरे से विश्लेषण करती है।

पुस्तक पर सार्थक चर्चा में उपजे कुछ सवालों के जवाब में लेखक अशोक कुमार पाण्डेय ने कहा कि किताब इस बात की पड़ताल करती है कि भगत सिंह को अक्सर गांधीजी के विपरीत एक ‘बंदूकधारी’ नायक और गांधीजी को उनके सामने ‘खलनायक’ के रूप में क्यों खड़ा कर दिया जाता है। लेखक स्पष्ट करते हैं कि इस किताब को पढऩे पर गांधीजी खलनायक के रूप में नहीं उभरते।

उन्होंने बताया कि किताब में भगत सिंह के उन विचारों को गहराई से रेखांकित किया गया है, जिनमें वे मानते थे कि केवल पिस्तौल और बम से क्रांति नहीं आती, बल्कि क्रांति की तलवार विचारों की धार बढ़ाने वाले पत्थर पर रगड़ी जाती है। साथ ही, हिंसा का सहारा केवल विकट आवश्यकता पडऩे पर ही लिया जाना चाहिए।

विगत रहे कि इस पुस्तक को तैयार करने में अशोक कुमार पाण्डेय ने पांच साल तक विभिन्न अभिलेखागारों, पुराने दस्तावेजों और प्रतिबंधित साहित्य का शोध किया है।

कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार दीपचंद सांखला, शशि मोहन मूंधड़ा, अनिरुद्ध उमठ, डॉ. तनवीर मालावत, शहर कांग्रेस अध्यक्ष मदन मेघवाल, कांग्रेस देहात अध्यक्ष बिशनाराम सियाग, पूर्व जिला महापौर मकसूद अहमद, जियाउल रहमान, डॉ. प्रशांत बिस्सा, आरके सुथार, महिपाल सारस्वत, रौनक व्यास, ऋषिमोहन जोशी, विक्रम स्वामी, एडवोकेट बलजीत, सुरेंद्र धारणिया, योगेश गहलोत, शरद आचार्य, डॉ. नरेश गोयल, के एल बोथरा, डॉ. नवदीप सिंह बैंस, मधुसूदन आचार्य, भूपेंद्र मिड्ढा, विनोद भोजक, गिरिराज खैरीवाल, डॉ चंद्रशेखर श्रीमाली, सीताराम कच्छावा, बुलाकी शर्मा, अविनाश व्यास, सावन पारीक, चंचला पाठक, अलका डॉली पाठक, डॉ. मीना आसोपा, असमा नाज़, संजय पुरोहित, जयनारायण बिस्सा, चित्रेश गहलोत, इरशाद अज़ीज़, अरविंद व्यास, ज्योति प्रकाश रंगा, आनंद स्वामी आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन रवींद्र हर्ष ने किया। पी वोहरा फाउंडेशन के संस्थापक डॉ पीएस वोहरा ने सबका आभार व्यक्त किया।